BSP: मायावती का 'परिवारवाद' से किनारा,परिवार का सहारा!
उत्तर प्रदेश में अपने मजबूत वोटबैंक का लोहा मनवाने वाली बहुजन समाज पार्टी के सामने नेतृत्व का संकट गहराता जा रहा है। बीएसपी अध्यक्ष मायावती के फैसलों को लेकर कार्यकर्ता मायूस हैं और तय ही नहीं हो पा रहा है कि अगले कुछ दिनों में क्या होगा?
शनिवार को मायावती ने सभी को उस वक्त चौंका दिया जब ऐलान कर दिया कि आकाश आनंद और ईशान को अब पार्टी में कोई भी महत्वपूर्ण पद अथवा जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। हालांकि ईशान के पास फिलहाल 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी है।
बसपा की कमान भतीजी दीपिका आनंद को सौंपी जा सकती है। मायावती ने इस बात के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि भाई आनंद कुमार को मदद के लिए यदि किसी सदस्य की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं। हालांकि दीपिका की ईमानदारी और कार्यक्षमता के आधार पर बीएसपी में दीपिका का भविष्य तय होगा।
कौन हैं दीपिका आनंद
दीपिका आनंद मायावती की भतीजी हैं। भाई आनंद कुमार की बेटी हैं। 22 साल की दीपिका विदेश में वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। आकाश और ईशान दोनों से उम्र में छोटी हैं। दीपिका को आगे लाकर मायावती महिला कार्ड खेल सकती हैं।
'परिवारवाद' से किनारा!
आकाश और ईशान को लेकर सोशल मीडिया में परिवारवाद के आरोपों के बीच मायावती ने साफ कहा कि काशीराम परिवारवाद से दूर रहे, मैं भी परिवारवाद के खिलाफ हूं। मायावती ने ये भी साफ कर दिया है कि भाई आनंद कुमार के बेटों को कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। दीपिका आनंद यदि तैयार नहीं होती हैं तो दलित समाज से ही अन्य किसी मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
GEN-Z को तरजीह
आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यूपी,उत्तराखंड, पंजाब में बीएसपी की ओर से संगठन में 50 फ़ीसदी तक भागीदारी युवाओं को दी जा रही है। मायावती ने कहा है कि चुनावों में भी युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विशेष रूप से GEN-G को टिकट दिए जाएंगे।
नेताओं की नहीं होगी घर वापसी
बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने ये भी साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर पार्टी से निकाले गये लोगों को वापस लिए जाने की अफवाह फैलाई जा रही है। ये पूरी तरह से फेक न्यूज़ है ऐसे लोगों को कतई बीएसपी में वापस नहीं लिया जाएगा।
यूपी ही नहीं अन्य कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक है लेकिन बीएसपी में आपसी खींचतान और मायावती की भावुक करने वाले पोस्ट के बाद अब पार्टी के कार्यकर्ता उदास हैं।
बहरहाल हर किसी की नजर अब मायावती के अगले कदम पर है कि परिवार, पार्टी और कार्यकर्ताओं के बीच कैसे समन्वय स्थापित करेंगी? वजह साफ है खुद को आयरन लेडी कहलाने वाली बसपा सुप्रीमो मुश्किल दिनों से जूझ रही हैं।