उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव की तस्वीर साफ हो चुकी है. कुल 11 सीटों में से बीजेपी को छह और सपा को पांच सीटें मिलीं हैं. इसमें अभी वाराणसी स्नातक सीट पर जीतब की घोषणा होना बाकी है. सपा उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा 20 हजार की लीड लेकर आगे हैं. इसमें प्रथम वरीयता में भी वे करीब 17 हजार से आगे हैं.
बीजेपी को सबसे बड़ा झटका वाराणसी से ही मिला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के बाद शिक्षक और स्नातक सीट हारने पर बीजेपी की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा झटका माना जा रहा है.
लखनऊ और आगरा जीते
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MLC चुनाव ने बीजेपी के लिए टेंशन लखनऊ स्नातक और आगरा की शिक्षक सीट पर मिली हार है. लखनऊ स्नातक सीट पर सपा से कांति सिंह जीतीं हैं उन्होंने बीजेपी के मौजूदा MLC अवनीश कुमार सिंह को हराया. आगरा में शिक्षक MLC सीट पर डॉ आकाश अग्रवाल ने जीत हासिल की.
आकाश अग्रवाल बीजेपी के बागी थे, जिन्हें सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया. इसके बाद आगरा में बीजेपी के अंदर की राजनीति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.
इन छह सीटों पर जीती BJP
लखनऊ शिक्षक स्नातक- उमेश द्विवेदी
मेरठ शिक्षक- श्रीचंद शर्मा
मेरठ स्नातक-दिनेश कुमार गोयल
बरेली-मुरादाबाद शिक्षक- डॉ हरि सिंह ढिल्लो
आगरा स्नातक- डॉ मानवेन्द्र प्रताप सिंह
गोरखपुर-फैजाब्द शिक्षक- ध्रुव कुमार त्रिपाठी
सपा ने इन पांच सीटों पर लहराया परचम
लखनऊ स्नातक- कांति सिंह
आगरा शिक्षक- डॉ आकाश अग्रवाल
वाराणसी शिक्षक-लाल बिहारी यादव
इलाहाबाद-झांसी स्नातक- डॉ मान सिंह यादव
वाराणसी स्नातक- आशुतोष सिन्हा आगे
कांटे की टक्कर-धांधली के आरोप
लगभग सभी सीटों पर सपा ने बीजेपी को जोरदार टक्कर दी, सिर्फ बरेली मुरादाबाद सीट को छोड़कर. गोरखपुर में जिस तरह से 300 वोटों से बीजेपी के उम्मीदवार ध्रुव कुमार त्रिपाठी जीते उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सपा और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मतगणना का बहिष्कार कर दिया था. यहां अधिकारियों पर बड़े आरोप लगाए गए.
2027 से पहले राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा
हालांकि इन चुनावों का असर आगामी विधानसभा चुनावों पर नहीं होगा, लेकिन इस परिणाम ने बीजेपी की रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रदेश में 19 साल से सरकार होने के बाद वाराणसी से दोनों सीट हारने पर विपक्ष तंज कस रहा है. उधर इस चुनाव परिणाम से सपा कार्यकर्ताओं का जोश सातवें आसमान पर है. लोकसभा चुनाव की तर्ज पर यह जोश बरकरार रहा तो आने वाले समय में बीजेपी के लिए कठिन परीक्षा होगी.
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