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रविवार, 1 नवम्बर 2026 · हिंदी समाचार
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सुप्रीम कोर्ट में पटाखों पर बैन और बेरियम पर सुनवाई

कोर्ट ने पटाखों पर फिलहाल पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से इंकार कर दिया है.

मुख्य बातें
  • 1- पटाखों पर पूरी तरह रोक नहीं.
  • 2-सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी.
  • 3-जागरूकता पर जोर.
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दीपावली के दौरान पटाखों पर रोक लगाने और प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. कोर्ट ने पटाखों पर फिलहाल पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से इंकार कर दिया है. इसके अलावा बेरियम वाले ग्रीन पटाखों को लेकर भी अभी संशय बना हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लोगों की भावनाओं को प्रभावित कर सकती है. इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि पूरे दिन आतिशबाजी की अनुमति नहीं दी जा सकती. इससे बुजुर्गों और बीमार लोगों को दिक्कत के साथ ही पर्यावरण को भी काफी नुकसान हो रहा है.

बेरियम वाले पटाखों पर क्या है मामला?

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दरअसल बेरियम का इस्तेमाल कुछ पटाखों में रंग और आतिशबाजी के प्रभाव के लिए किया जाता है.  इसके इस्तेमाल से होने वाले प्रदूषण को लेकर चिंता जताई गई है. इसी वजह से बेरियम आधारित पटाखों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने के लिए विशेषज्ञों की रिपोर्ट मांगी गई थी.

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से कहा गया था कि बेरियम वाले पटाखों के प्रभाव का आकलन करने के लिए खुले मैदान में परीक्षण जरूरी है. अदालत ने इस मुद्दे पर रिपोर्ट के आधार पर आगे विचार करने की बात कही थी.

पटाखों पर पूरी तरह रोक या तय समय में अनुमति?

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पटाखों के इस्तेमाल को लेकर ऐसा रास्ता निकालना होगा, जिससे धार्मिक और सामाजिक भावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण और लोगों की सेहत का भी ध्यान रखा जा सके.  अदालत ने संकेत दिया था कि पटाखों के इस्तेमाल के लिए समय-सीमा तय की जा सकती है.

यहां बता दें कि पिछले काफी समय से दिवाली और अन्य त्योहारों पर आतिशबाजी पर बैन लगाने की मांग चल रही है. क्योंकि इससे प्रदूषण से जनजीवन प्रभावित हो जाता है. दिवाली के मौके पर दिल्ली-एनसीआर में AQI रेड जोन में चला जाता है और सरकार को इमरजेंसी हालात में स्कूल तक बंद करने पड़ते हैं, लोगों को सांस लेने में तकलीफ की घटनाएं बढ़ जातीं हैं. हालांकि सिर्फ आतिशबाजी ही प्रदूषण बढ़ने का कोई एक कारण नहीं है. इसके अलावा भी कई और वजहें हैं जिनसे प्रदूषण बढ़ता है.

उधर सुप्रीम कोर्ट लगातार लोगों को जागरूक करने की बात कह रहा है, लेकिन उस स्तर पर सरकार या निजी संस्थाओं द्वारा कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है. जिस प्रकार अब प्रदूषण को लेकर लोगों की चिंताएं बढीं हैं आने वाले समय में इसमें बदलाव देखने को मिल सकता है. इससे भविष्य में कुछ सुधार दिख सकता है.

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Jai Prakash
लेखक के बारे में
Jai Prakash · नेशनल डेस्क

चौकस खबर के एडिटर। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति, अपराध और ज़मीनी मुद्दों पर रिपोर्टिंग।

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