प्रदेश में 1 नवंबर से लागू होगा FSDA का नया नियम
यूपी में फ़ूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानि FSDA की ओर से बड़ा फैसला लिया गया है. सुरक्षित दवा और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए अब 1 नवंबर से सभी रिटेल फार्मेसी के लिए वेबसाइट जरूरी होगी. इस वेबसाइट पर दवा के स्टॉक से लेकर ख़रीद-बिक्री की क़ीमत भी लिखनी पड़ेगी.
प्रदेश में तमाम अस्पताल फार्मेसियों की जानकारी भी ऑनलाइन होगी. फार्मासिस्ट के लाइसेंस समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां इस वेबसाइट पर अपडेट करनी होंगी. ड्रग इंस्पेक्टर लगातार इसकी निगरानी करेंगे. औषधि प्रशासन का फैसला मरीजों के हित और दवा कारोबार में पारदर्शिता लाने के लिए लिया गया है.
वेबसाइट में क्या जानकारी होगी?
फार्मेसी का लाइसेंस नंबर
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फार्मासिस्ट का नाम
लाइसेंसी परिसर
दवा स्टॉक से जुड़ी जानकारी
दवा की ख़रीद क़ीमत और बिक्री कीमत
नए थोक लाइसेंस भी मिलेंगे
फ़ूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से दवा कारोबारियों को सहूलियत देने का ऐलान भी किया गया है. नए थोक बिक्री लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक भी हटाने का फैसला लिया गया है. 11 अक्टूबर से नए लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे. दवा कारोबारियों के हितों को देखते हुए ये क़दम उठाया जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने मूल्य पर की थी टिप्पणी
देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में दवाओं की क़ीमत और जेनेरिक दवाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कीमतों को लेकर कठोर टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 2700 रुपए वाली कैंसर की दवा की MRP 27000 रुपए क्यों है. कोर्ट ने कहा था यह ‘नरसंहार’ है.
जाँच में हुआ बड़ा खुलासा
यूपी में FSDA की ओर से 214 अस्पताल फार्मेसियों की जाँच की गई जिसमें दवाओं की ख़रीद क़ीमत और पैक पर छपी एमआरपी में बड़ा अंतर सामने आया. 130 दवाओं की जाँच की गई तो पता चला कि 36 दवाओं की एमआरपी पर 10 गुना से भी ज्यादा पैसा वसूला जा रहा है. कुछ दवाईयां तो ऐसी भी मिलीं जिन पर 67 गुना ज्यादा क़ीमत वसूली जा रही थी. इन दवाईयों में ICU और गंभीर संक्रमण में काम आने वाली कई जीवनरक्षक दवाएं और डिवाइस भी शामिल हैं.
बाज़ार में बिक रही दवाओं की कीमत के आधार पर जरूरी दवाओं की अधिकतम सीमा तय की जाती है. अधिक क़ीमत पर बेचना नियम के ख़िलाफ़ है. स्वास्थ्य मंत्रालय दवाओं की सुरक्षा, असर और मूल्य के मुताबिक़ जरूरी दवाओं की लिस्ट बनाता है. समय - समय पर इस लिस्ट की समीक्षा की जाती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्यों न जरूरी दवाओं पर मार्जिन 16 फीसदी तय कर दिया जाए, हालांकि अंतिम निर्णय नहीं हो सका है.
बहरहाल अब यूपी में FSDA के इस नये फैसले का क्या असर होता है इस पर आम लोगों की नज़र रहेगी. पहले से ही कई नियम क़ानून मौजूद हैं लेकिन उनके पालन पर ज़िम्मेदार मौन रहते हैं और सरकारी फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे रहते हैं. 1 नवंबर से लागू हो रहे इस नियम को लेकर दवा कारोबारियों में खुसफुसाहट शुरू हो गई है.
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