मुख में राम बगल में छुरी! यूपी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद क्या इसी अंदाज में राजनीति कर रहे हैं? दरअसल ये सवाल इसलिए खड़ा हो गया है क्योंकि संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए दस्यु फूलन देवी की सुपारी किलिंग का आरोप समाजवादी पार्टी पर खास हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए लगाया है.
दो दिन पहले ही वह नेता प्रतिपक्ष और सपा के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पाण्डेय से मिले थे तब हर तरफ चर्चा थी कि संजय निषाद सपा के लिए सॉफ्ट कॉर्नर रख रहे हैं. पॉलिटिकल पंडित तो यहां तक कहने लगे थे कि संजय निषाद के रिश्ते बीजेपी से खराब हो रहे हैं हालांकि कुछ लोग इसे दबाव की सियासत बता रहे थे.
संजय निषाद शुक्रवार को गोरखपुर में थे. बीजेपी के यूपी चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े का स्वागत करने पहुंचे थे और उससे पहले ही उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट ने हंगामा मचा दिया. बीजेपी ने मोहभंग होने की अटकलों पर संजय निषाद ने मोहभंग वाली भाषा का इस्तेमाल करते हुए फूलन देवी के बहाने सपा पर तीखा हमला किया.
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संजय निषाद की पोस्ट
"जब वीरांगना फूलन देवी जी का सपा से मोहभंग हुआ और उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई, तब सुपारी देकर उनकी आवाज दबा दी गई. सपा ने कभी निष्पक्ष जांच की मांग क्यों नहीं की? डर था कि असली चेहरे बेनकाब हो जाएंगे? मछुआरा समाज अब हर धोखे का हिसाब लेगा."
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जाहिर है चुनावी बेला में जुबानी तीर बहुत मायने रखते हैं. दोस्ती- दुश्मनी अपनी जगह है लेकिन समर्थकों और वोटबैंक को ध्यान में रखकर बड़ी ही चतुराई से ऐसी बयानबाजी सामने आती है जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. फिलहाल समाजवादी पार्टी अब इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देती है, इस पर सभी की नजर है.
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