उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी के आठ प्रत्याशियों ने मंगलवार को नामांकन दाख़िल कर दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में विधानभवन परिसर में नामांकन की प्रक्रिया पूरी की गई. हालांकि बीजेपी ने नौवां पर्चा किसके लिए खरीदा है ये सस्पेंस बना हुआ है.
यूपी कोटे की दस राज्यसभा सीटों के लिए निर्वाचन निर्विरोध होने की संभावना जताई जा रही है. बीजेपी के सभी आठ उम्मीदवारों की ओर से पर्चा दाख़िल कर दिया गया. इस दौरान मुख्यमंत्री योगी समेत पार्टी के दिग्गज नेता विजयी चिन्ह बनाते हुए प्रसन्न मुद्रा में तस्वीर खिंचाते नज़र आए. बीजेपी की ओर से नौ पर्चे खरीदे गए हैं लेकिन संभावना जताई जा रही है कि अब विधायकों की संख्या के मुताबिक़ नौवां उम्मीदवार नहीं उतारा जाएगा.
निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय
विधायकों की संख्या के हिसाब से बीजेपी के पास आठ प्रत्याशियों की जीत के लिए पर्याप्त संख्या का इंतज़ाम है. उधर समाजवादी पार्टी की ओर से दो प्रत्याशियों का नामांकन पहले ही हो चुका है और उनका भी जीतना तय है. तीसरे उम्मीदवार के लिए समाजवादी पार्टी ने इशारों-इशारों में ही इनकार कर दिया है. मतलब साफ़ है कि यदि कोई और उम्मीदवार नहीं आता तो सभी दस उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय है.
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अखिलेश यादव ने क्या कहा
दरअसल समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरा पर्चा खरीदा गया लेकिन उम्मीदवार उतारने की संभावना को पार्टी मुखिया ने ही पूर्ण विराम लगा दिया. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि ‘अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है.’ अखिलेश की इस लाइन के बाद तय हो गया कि अब समाजवादी पार्टी तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगी.
बीजेपी की रणनीति भी तय
सूत्रों की मानें तो बीजेपी नेतृत्व ने भी सिर्फ आठ उम्मीदवारों पर ही फ़ोकस करने का फैसला किया है. पार्टी के बड़े नेताओं से लेकर राज्य में भी ये संदेश दे दिया गया है कि इन आठ प्रत्याशियों पर ही चुनाव होना है. बीजेपी के यूपी प्रभारी विनोद तावड़े भी लखनऊ दौरे पर हैं और राज्यसभा चुनाव के साथ एमएलसी कोटे की सीटों के लिए भी चुनाव का फ़ीडबैक ले रहे हैं.
मंत्री की कुर्सी जाना भी तय!
राज्यसभा चुनाव का असर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल पर भी पड़ेगा. योगी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह की कुर्सी भी खाली हो जाएगी. राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद धर्मपाल सिंह जिस बरेली जिले की आंवला विधानसभा सीट से चुनाव जीते हैं वह भी खाली हो जाएगी. हालांकि उपचुनाव की संभावना न के बराबर है क्योंकि विधानसभा चुनाव में छः महीने का वक्त नहीं बचा है. अब चर्चा इस बात की है कि धर्मपाल सिंह का विभाग किसे दिया जाएगा. उधर केन्द्र के दो मंत्री भी यूपी कोटे से राज्यसभा सांसद हैं जिनका कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है उनका क्या होगा. इस बात पर भी सस्पेंस बना हुआ है.
यूपी में राज्यसभा सीटों ने कई दिलचस्प पहलू सामने ला दिए हैं. जिन नामों को लेकर कयासबाजी चल रही थी वो कहीं दूर तक नहीं दिखे. पहले समाजवादी पार्टी ने कार्पोरेट जगत के बड़े चेहरे को लाकर चौंकाया तो बीजेपी ने पूरी लिस्ट से ही सभी को हैरान कर दिया. बहरहाल माना जा रहा है कि अखिलेश के इशारे के बाद ये बात लगभग तय हो चुका है कि राज्यसभा चुनाव के लिए यूपी में वोटिंग की संभावना न के बराबर है.
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