बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चुनावी अभियान की तैयारी शुरू कर दी है. मेरठ से सहारनपुर तक 2 दिनों में कई महत्वपूर्ण बैठकें ही नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच खास संदेश देने की कोशिश BJP अध्यक्ष की ओर से की गई.
मेरठ में पहले दिन कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ लगभग 11 घंटे बैठक कर फीडबैक लिया. 4 बड़ी बैठकें और युवाओं के साथ संवाद भी किया. बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन में शामिल हुए और कई टीमों से भी जानकारी जुटाई.
दलित और युवा वोटरों पर खास नजर
नितिन नवीन ने मेरठ की निजी यूनिवर्सिटी में युवाओं को संबोधित किया और इस कार्यक्रम में सीएम योगी समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे. युवा वर्ग के साथ संदेश बताता है कि GEN-G आंदोलन के बाद पार्टी का फोकस है. उधर सहारनपुर में BJP अध्यक्ष ने पार्टी के दलित कार्यकर्ता के घर भोजन किया और संत रविदास मंदिर भी गए. सहारनपुर में 22 फीसदी के आसपास दलित वोटर हैं और चुनाव में निर्णायक भूमिका में हैं. BJP दलित वोटबैंक को 2022 की तरह साधे रखना चाहती है.
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सपा पर नितिन का 'नवीन' निशाना
BJP का मुकाबला उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी से है और इसीलिए नितिन नवीन लगातार अखिलेश के खिलाफ हमलावर रहे. परिवारवाद से लेकर कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे पर उन्होंने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया पर निशाना साधा.
नितिन नवीन के बयान, निशाने पर विपक्ष
" जिन्होंने केवल अपने परिवार के भविष्य को देखा, वे कभी उत्तर प्रदेश के युवाओं की चिंता नहीं कर सकते"
"अंग्रेजों की डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी को पहले कांग्रेस ने अपनाया और बाद में समाजवादी पार्टी ने भी उसी राह पर राजनीति की"
अखिलेश यादव का निशाना
उधर नितिन नवीन के दौरे पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी निशाना साधा. अखिलेश ने कविता लिखने के अंदाज में सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि 'कहने को ये राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं लेकिन अपनी ही पार्टी में विपक्ष हैं.' जो खुद हार गए थे अपना बूथ, जिन्होंने पिया अपमान का घूंट.' अखिलेश यादव ने उनको पार्टी पर बोझ तक बता दिया.
जाहिर है विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी BJP अपनी किलेबंदी में जुटी है. कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और वोटबैंक को साधे रखने की कवायद जारी है. उधर अखिलेश यादव भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर नजरें लगाए हैं क्योंकि इसबार उनके पुराने साथी जयंत चौधरी ने साथ छोड़ दिया है और अब वह बीजेपी सरकार में साझेदार हैं.
हालांकि मेरठ से लेकर सहारनपुर और बिजनौर तक लगातार समीकरण बदल रहे हैं क्योंकि चंद्रशेखर आज़ाद और BSP का भी मजबूत वोट बैंक यहां हार जीत पर असर डालता है और खेल बिगाड़ने का माद्दा रखता है.
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