उत्तर प्रदेश के संभल में नवंबर 2025 के मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज के खिलाफ NSA की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करते हुए यूपी सरकार पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है.
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी पलट दिया जिसमें अफरोज की हिरासत को बरक़रार रखा गया था. इस मामले में सुनवाई जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की.
क्या है पूरा मामला ?
संभल में 24 नवंबर 2024 में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गयी थी.इस घटना में चार लोगों की मौत भी हुई थी. अफरोज को 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था. जब वह न्यायिक हिरासत में थे तो उसके खिलाफ NSA लगाया गया.
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अफरोज ने इसके खिलाफ इलाहबाद हाईकोर्ट में अपील की थी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई को सही ठहराया था. जिसके बाद अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
सुप्रीमकोर्ट ने कुबूलनामे पर जताई आपत्ति
सुनवाई की दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कुबूलनामे पर सवाल उठाया. अदालत के मुताबिक,इस तरह के कथित कुबूलनामे पर हिरासत का आदेश जारी नहीं किया जा सकता.
यूपी सरकार पर 10 लाख का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत को गैर-कानूनी मानते हुए यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च लगाया है. अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 8 जून 2026 के फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें NSA के तहत अफरोज की हिरासत को सही ठहराया गया था.
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