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रविवार, 1 नवम्बर 2026 · हिंदी समाचार
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उत्तराखंड

कुमाऊँ में दलित राजनीति की बयार, BJP का राज्यसभा वाला प्रहार

बीजेपी ने उत्तराखंड में दलित नेता को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया इसके बाद कांग्रेस की दलित पॉलिटिक्स को बड़ा झटका लगा है

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BJP राज्यसभा प्रत्याशी दिनेश आर्य

बीजेपी मीडिया सेल

कुमाऊँ के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में काँग्रेस ने जिस दलित राजनीति को धार देने की कोशिश की अब बीजेपी ने उसी कुमाऊँ मंडल से दलित नेता को राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया है. दावा किया जा रहा है कि बीजेपी ने कुमाऊँ मंडल में एक और बड़ा नेता तैयार कर दिया है. रविवार को बीजेपी ने दिनेश आर्य को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया तो ये चर्चा आम हो गई.

दिनेश आर्य का नाम चौंकाने वाला

बीजेपी ने उत्तराखंड से राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में दिनेश आर्य का नाम घोषित कर तमाम नेताओं को हैरत में डाल दिया है. दरअसल बीजेपी ने एक नाम से राजनीति के कई पहलुओं को एक ही छतरी के नीचे ला दिया है. पिछले दिनों हल्द्वानी में काँग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के दौरान मंच शुद्धिकरण मामले पर ख़ूब सियासत हुई थी. काँग्रेस नेताओं ने दलित नेता के अपमान का आरोप लगाया था. अब बीजेपी ने दलित कार्ड खेलते हुए दिनेश आर्य को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर ली है.

हालांकि कुमाऊँ में बीजेपी के पास पहले से ही दलित नेता के तौर पर केन्द्रीय मंत्री और सांसद अजय टम्टा, धामी सरकार में मंत्री रेखा आर्य समेत कई बड़े चेहरे मौजूद हैं. हालांकि काँग्रेस के पास भी यशपाल आर्य के रूप में बड़ा दलित चेहरा कुमाऊँ मंडल से है. फ़िलहाल दिनेश आर्य का नाम घोषित होते ही बीजेपी में भी कई नेताओं को झटका लगा है क्योंकि सूत्र बताते हैं कि एक बाहरी चेहरे की सिफारिश चल रही थी.

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दिनेश आर्य का प्रोफ़ाइल जानिए

बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवार दिनेश आर्य सीएम पुष्कर सिंह धामी के करीबी माने जाते हैं. साल 2013 से 2016 तक बीजेपी के नैनीताल ज़िलाध्यक्ष रहे. उसके बाद बीजेपी अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष बने. साल 2017 और 2022 में नैनीताल सीट पर विधानसभा टिकट के दावेदार थे लेकिन सफलता नहीं मिली. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जनसंपर्क टीम का हिस्सा रहे और अब राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण समिति में उपाध्यक्ष हैं. दूरस्थ क्षेत्र में पेयजल के लिए कई काम किए हैं जिनकी सराहना होती है.

उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में भी बीजेपी ने एक फैसले से लोगों को चौंका दिया. दावा किया जा रहा है कि इस फैसले से न सिर्फ जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा होगा बल्कि कुमाऊँ मंडल में बीजेपी की पकड़ दलित वोटरों में और मज़बूत होगी.

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Mukesh Kumar
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Mukesh Kumar · उत्तराखंड डेस्क
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