उत्तराखंड सरकार की ओर से पहली बार चंपावत जिले में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया. प्रदेश के दूरदराज़ वाले इलाकों और सीमांत क्षेत्र तक शासन की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए सीएम धामी की ओर से ये क़दम उठाया गया. बनबसा एनएचपीसी परिसर में आयोजित कैबिनेट बैठक में चौबीस प्रस्तावों पर चर्चा की गई.
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में एक बार फिर चुनाव से पहले राज्य सरकार की ओर से जनता के बीच शासन की पहुँच होने का संदेश देने की कोशिश की जा रही है. अब जिला स्तर पर कैबिनेट बैठक का आयोजन किया जाएगा. हालांकि इससे पहले भी हरिद्वार में हर की पैड़ी, चमोली में गैरसैंण, अल्मोड़ा, पौड़ी, केदारनाथ धाम, टिहरी झील में कैबिनेट बैठक हो चुकी है. अब चुनाव नज़दीक है लिहाजा धामी सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है. रविवार को चंपावत जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे बनबसा में कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए.
24 प्रस्तावों पर कैबिनेट में चर्चा
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वन विभाग से जुड़े मामले निस्तारित करने के लिए पीएमयू बनाने पर चर्चा
टिहरी के नरेन्द्रनगर में सब रजिस्ट्रार कार्यालय खोला जाएगा
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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने क्या कहा
“उत्तराखंड के हर क्षेत्र का संतुलित विकास राज्य सरकार की प्रतिबद्धता है. सीमांत गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक विकास की गति को समान रूप से आगे बढ़ाया जाएगा. जब कैबिनेट बैठक अलग-अलग क्षेत्रों में होंगी तो वहां की स्थानीय परिस्थितियों. जन अपेक्षाओं और विकास की जरूरतों को समझने और उन पर फैसले लेने में मदद मिलेगी.”
2010 से शुरू हुई देहरादून से बाहर कैबिनेट मीटिंग
देहरादून से बाहर कैबिनेट मीटिंग की शुरूआत साल 2010 से शुरू हुई थी. हरिद्वार से होते हुए गैरसैंण, पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा, केदारनाथ और अब चंपावत जिले का बनबसा. हालांकि चंपावत से सीएम धामी का भी सीधा कनेक्शन है क्योंकि वह इसी जिले से विधायक हैं. हालांकि 2022 के चुनाव में वह अपनी सीट हार गए थे.
बहरहाल अब जनता से जुड़ने का संदेश देने के लिए जिलों में कैबिनेट बैठक का आयोजन किया जा रहा है. दावा है जनता से जुड़ने का लेकिन असल में इस पर कितना अमल हुआ ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा.
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